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Thursday, October 10, 2013

News विद्यापति गीत से की थी शुरुआत : मनोज

विद्यापति के गीत 'के पतिया लय जायत रे मोरा प्रियतम पास' से अपने गायकी जीवन शुरू करने वाले मनोज तिवारी आज भोजपुरी के स्टार गायक व अभिनेता हो गए हैं। मिथिलांचल की मिट्टी ने उन्हें बहुत कुछ दिया है। युनिवर्सिटी क्रिकेटर के रूप में दरभंगा में खेलना उन्हें अभी भी याद है। ये बातें बुधवार को निजी कार्यक्रम में मधुबनी जाने के दौरान दरभंगा में ठहरे अभिनेता मनोज तिवारी ने दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में कही। उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा बनारस घराने के गायक व पिता चंद्रदेव तिवारी से ली। सुन-सुन कर ही वे संगीत में निष्णात हुए। कैमूर जिले के अतरवलिया गांव में जन्मे श्री तिवारी का पहला अलबम 'बारी शेर पर सवार' 1992 में आया। 1996 में गुलशन कुमार से नोएडा में मुलाकात के बाद उनकी किस्मत चमकी। और देखते ही देखते वे न केवल देश बल्कि विदेश में बसे भोजपुरिया लोगों के दिलों पर छा गए। बीच के चार सालों में कड़े संघर्ष से गुजरना पड़ा। 2003 में उन्होंने 'ससुरा बड़ा पैसा वाला' से फिल्म जीवन की शुरुआत की। भोजपुरी गीतों में सामाजिक समस्याओं व पश्चिमी उपकरणों का प्रयोग करने के दौरान भारी परेशानी उठानी पड़ी। उन्होंने युवाओं से कहा कि उन्हें अपनी सफलता में देश व राज्य की उपयोगिता को देखना चाहिए। साथ ही उन्होंने मां दुर्गा से जाति व धर्म से उपर उठने की सोच लोगों को देने की बात कही। मिथिलांचल के बारे में उन्होंने कहा कि यहां के लोग भोले-भाले व सच्चे हैं। उनके आदर्श अमिताभ बच्चन हैं। वे अभिनेत्री में नूतन को पसंद करते हैं।

दरभंगा से भी रहा है नाता : अंतर विवि क्रिकेट खेलने 1989 में वे दरभंगा आए थे। साथ ही उनके पहले अलबम में साथी कलाकार विजय कपूर व सुरेश चौधरी मिथिलांचल के थे।

नौकरी छोड़ जुड़े संगीत से :

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से इतिहास विषय से स्नातक श्री तिवारी 1996 में बिहार, यूपी और भारत तिब्बत सीमा पुलिस में इंस्पेक्टर की परीक्षा में सफल हुए। आइओसी में भी उन्हें खेल कोटे से नौकरी मिली। लेकिन उन्हें तो संगीत की सुर लहरियों में गोता लगाना भाता था। बस क्या था सब कुछ छोड़कर उन्होंने संगीत और फिल्म की दुनिया को अपना लिया।

Source: Jagran

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